बाइबल कि गलतियां

बाइबल के भगवान ने शुरू से ही बहुत गलतियां कि है, बाइबल पढ़ना शुरू करते ही आप ध्यान से चीजों को पढ़ेंगे तो आपको आसानी से समझ आएगा!
मगर इसके लिए आपको थोड़े समय के लिए आध्यात्म से दूरी बनानी पड़ेगी!

नोट: अगर हमारी जानकारी आपको गलत लगे तो आप इस लिंक पर जाकर पड़ताल कर सकते है!
https://www.bible.com/hi/bible/1682/GEN.1.HINDICL-BSI


1 छंद में भगवान ने पृथ्वी और आकाश की सृष्टि बनाई ऎसा उल्लेख है!

याहापर भगवान ने सिर्फ पृथ्वी और आकाश की बात की है, विज्ञान की नजर से देखा जाए तो सृष्टि में करोड़ों गृह तारे है जो पृथ्वी से पहले बने है जिसका जिक्र यहां कहिपर नहीं आता है!

2 छंद के हिसाब से पृथ्वी सुनसान और बेडौल थी पानी के ऊपर अंधकार छाया था, और भगवान की आत्मा उस गहरे पानी के ऊपर मंडरा रही थी!

यहापर पहले छंद में तो बताया है की भगवान ने पृथ्वी और आकाश की सृष्टि बनाई फिर अब परमेश्वर का आत्मा कहा से आया?
इसका क्या मतलब निकाल सकते है?
पृथ्वी और आकाश परमेश्वर ने बनाया या उनकी आत्मा ने?

3 छंद के अनुसार भगवान ने कहा प्रकाश हो जा प्रकाश हो गया!

अब इसमें दिक्कत ये है कि 1 छंद में परमेश्वर खुद हाजिर है, 2 छंद में उनकी आत्मा का उल्लेख है, और 3 छंद में फिर से परमेश्वर का उल्लेख आता है!
इसमें दूसरी बात ये है कि परमेश्वर सिर्फ बोलता है और प्रकाश हो जाता है! इसका मतलब परमेश्वर को कुछ करने की जरूरत नहीं वो सिर्फ भगवान ने बोला तो वो चीज हो जाती है!

4 छंद के अनुसार भगवान ने देखा कि प्रकाश अच्छा है, भगवान ने प्रकाश और अंधकार को अलग अलग किया!

अब इसमें भी दिक्कत है कि जब भगवान ने प्रकाश बनाया और फिर भगवान ने देखा कि ये अच्छा है! इससे ये निष्कर्ष निकलता है कि भगवान को पहले प्रकाश अच्छा होता है मालूम ही नहीं था, जब बनाया तब देखकर तय किया कि ये अच्छा है या बुरा!
मतलब भगवान कुछ भी बिना प्लैनिंग किए करे जा रहे है, बाद में देखा जाएगा अच्छा है या बुरा?

5 छंद के अनुसार भगवान ने प्रकाश को दिन और अंधकार को रात का नाम दे दिया, शाम हुई फिर सुबह हुई ये पहला दिन हो गया!

यहां भगवान की एक बात गौर करने वाली है, भगवान को कुछ चीजों के नाम पहले से पता है उसे सिर्फ भगवान हो जा बोलते है वो हो जाती है, जैसे कि प्रकाश हो जा बोला तो प्रकाश हो गया! और कुछ चीजों को भगवान बनाने के बाद नामकरण करते है, जैसे दिन और रात को बाद ने नामकरण किया गया!
वैसे भगवान को इतनी दिक्कत का सामना करने की जरूरत नहीं थी, सीधा बोल देते दिन और रात हो जा तो हो जाते थे!

6, 7, 8 छंद के अनुसार भगवान ने पानी को दो हिस्सों में बांट दिया नीचे और ऊपर में और इस अंतर को आकाश नाम दिया, और वैसे ही हो गया!

अब दिक्कत ये है कि हमने पहले छंद में भी देखा कि भगवान ने पृथ्वी और आकाश बनाया, अब फिर से भगवान ने आकाश बनाया है तो पहले छंद में सिर्फ पृथ्वी ही बनी थी क्या?
दूसरी दिक्कत ये है कि पहले वाक्य में कहा है कि भगवान ने आकाश नाम दिया और बाद ने कहा है कि ऎसे ही हुआ मतलब कुछ साफ़ समझ नहीं आता, एक बार भगवान ने खुद किया कहा है बाद में ऐसे ही हुआ कहा है!

९ वे छंद के अनुसार फिर भगवान ने कहा कि नीचे का पानी एक जगह इकट्ठा हो और भूमि दिखाई दे, ऐसे ही हुआ, और भगवान ने देखा कि अच्छा है!

याहापर भी वही सवाल आता है, कि भगवान को पहले पता ही नहीं था कि ये अच्छा है, बाद में देख कर तय कर रहे है कि ये अच्छा है!
अगर मान लो भगवान को ये अच्छा ही नहीं लगता तो बाइबल के भगवान की दो दिनों की मेहेनात खराब हो जाती क्या?

१० वे छंद के अनुसार भगवान ने उस सुखी भूमि को पृथ्वी कहा और उस इकठ्ठा किए जल को समुद्र कहा, और भगवान ने देखा कि ये अच्छा है!

इस छंद को अगर हम ध्यान से पढे और छंद १ को भी ध्यान से पढे तो हमें पता चलेगा कि बाइबल का भगवान थोड़ासा भुलक्कड़ है, क्यों कि छंद १ में भी भगवान ने पृथ्वी और आकाश बनाया था, अब भगवान फिर से एक ही चीज को पुनः पुनः नामकरण कर रहे है!
और फिर देख कर कह रहे है कि ये अच्छा है, बाइबल के भगवान को कुछ पहले से मालूम ही नहीं है कि कोनासी चीज अच्छी है कोनसी बुरी बस बिना देखे किए जा रहे है और बाद ने देख कर कह रहे है, ये तो अच्छा है!

छंद ११ के अनुसार फिर भगवान ने घास पेड़ फल देने वाले बीज देने वाले पेड़ बने ऐसा कहा और वैसे ही हो गया!

इस छंद को दिमाग में फिट कर लीजिए क्यों की बाइबल के भगवान ने आगे फिर एक बार अगले कुछ छंदों में फल देने वाले पेड़ पुनः बनाए है!

छंद १२ में पुनः छंद ११ वाली बातें बताई है, और ये अच्छा है ऐसा कहा है भगवान ने!

छंद १३ के अनुसार फिर शाम हुई और सुबह हुई ये तीसरा दिन खत्म हो गया!

14, 15, 16, 17, 18, 19 वे छंदों में भगवान ने सूरज, छंद आकाश में तारे भी बनाए जिससे दिन और रात हो सके और उसकी एक समय सीमा भी तय की और चौथा दिन हो गया!

अब इसमें बहुत दिलचस्प बात ये है कि जब भगवान ने चौथे दिन सूरज और चांद बनाए तो अब तक तीन दिन रात बिना सूरज के है कैसे हो रहे थे?

आगे भी बाइबल की गलतियों पर हम आपको बताते रहेंगे, आपको ये पोस्ट कैसी लगी कॉमेंट करके जरूर बताएं!