Battle of Uhud [Hindi]

बदर की जंग के तकरीबन एक साल बाद उहद की जंग हो गई।
जब मक्का वालों ने बदर की लड़ाई का हिसाब चुकता करने का फैसला किया।

मुहम्मद साहब हमेशा ये दिखाने की कोशिश करते थे कि उन्हें अपने अल्लाह पर बेहद भरोसा है। लेकिन मुहम्मद साहब की बातों में और कामों में बेहद अंतर था। मुहम्मद साहब कहते कुछ थे, और करते कुछ थे। कई बार मुहम्मद साहब ने ये बात कही है कि अल्लाह मेरी मदद करेगा, और मुझे हर लड़ाई में बचाएगा।

जैसे कि आयत:
Sura Al-Ma'idah 5.67

يَا أَيُّهَا الرَّسُولُ بَلِّغْ مَا أُنزِلَ إِلَيْكَ مِن رَّبِّكَ ۖ وَإِن لَّمْ تَفْعَلْ فَمَا بَلَّغْتَ رِسَالَتَهُ ۚ وَاللَّهُ يَعْصِمُكَ مِنَ النَّاسِ ۗ إِنَّ اللَّهَ لَا يَهْدِي الْقَوْمَ الْكَافِرِينَ

मुहम्मद साहब ने लोगों को बताया की अगर तुम लोग जंग में दुश्मन के घेरे में भी आ जाओगे तो भी अल्लाह आप लोगोंको बचाएगा।

एक बार ऑफ बिन कारिस ने पूछा कि ये अल्लाह के रसूल, अल्लाह अपने बंदे की किस बात पर खुशी से मुस्कुराता है?
तब मुहम्मद साहब ने कहा, "जब कोई व्यक्ति हिफाजती लिबास पहने बिना दुश्मन पर टूट पड़ता है।"

ऑफ मुहम्मद साहब की बाते सुनकर जज्बाती हो गया और बिना किसी सुरक्षा सामान के जंग में उतर गया, और मारा गया।
(ऑफ बदर की जंग में मारा गया था।)

ऑफ की मौत का मुहम्मद साहब के जीवन पर जरूर असर हुआ होगा, क्युकी इस उहद की जंग में मुहम्मद साहब में एक कि जगह २ सुरक्षा कोट पहने थे। और अपनी फौज के सबसे आखिर में खुदको खड़ा किया। और ८ से १० लोगोंको सिर्फ अपनी सुरक्षा करने के लिए रख लिया।

मक्का वाले इस बार पूरी तय्यारी के साथ आए थे, इसलिए उन्होंने मुहम्मद साहब के नजदीकी लोगों को मारकर मुहम्मद साहब के करीब जाना शुरू कर दिया।

मुहम्मद साहब घबरा गए, और उन्होंने अपने लोगोंको जन्नत की लालच देना शुरू कर दिया।

"Sahih Muslim KITAB AL-JIHAD" की एक हदीस में इसकी जानकारी दी गई है। उहद की जंग वाले दिन जब दुश्मन भारी पड़ गया तब मुहम्मद साहब की हिफाजत के लिए मदीना के ७ लोग और कुरेश के २ लोग बच गए। जब दुश्मन मुहम्मद साहब के करीब बढ़ने लगे तो मुहम्मद साहब बोले, "जो इन लोगोंको यहासे दूर भगवाएगा वो जन्नत में जाएगा, बल्कि जन्नत में वो मेरे साथ होगा।"
ये सुनकर एक अंसारी यानी मदीने का आदमी आगे बढ़ा और मारा गया, इसी तरह एक एक करके सात अंसारी मारे गए।
इस दौरान सारे मुस्लिम बिखर गए, और मुहम्मद साहब अकेले पड़ गए।
अब मुहम्मद साहब के पास मरनेके अलावा कोई दूसरा रास्ता नजर नहीं आ रहा था, इस डर से मुहम्मद साहब वाहापर जंग में मरे उनके साथियों के बिचमे जाकर लेट गए, और मरने का नाटक करने लगे। तब लोगों मुहम्मद साहब को तलाश करना शुरू कर दिया, कुछ लोगोंको तो ये लगा की शायद मुहम्मद साहब मर गए।
कुछ लोग तो ये कह रहे थे कि अब जिंदगी का क्या मकसद बचा है, ऐसे लड़ो जैसे मुहम्मद साहब लड़कर शहीद हो गए।

मुहम्मद साहब को तलाश करते हुए एक सहाबी (का बिन मलीक) मुहम्मद साहब के पास पोहोंच गया, सहाबी कहता है कि मुहम्मद साहब की आंखे फड़फड़ा रही है, जब उसको पता चला कि मुहम्मद साहब जिंदा है तो उसने चिल्लाना शुरू कर दिया, "रसूल जिंदा है, रसूल जिंदा है।" तब मुहम्मद साहब ने उसे चुप रहने का इशारा कर दिया।

"Ibn e hisham" में लिखा है की इसके बाद अबू नामका व्यक्ति सामने आया और मुहम्मद साहब के आगे उसने इंसानी कवच बना दिया, और अपनी कमर पर तीर खाता रहा।
इसके बाद मुहम्मद साहब अपने एक साथ अबू तला की मदद से वाहसे भाग खड़े हुए।

२ सुरक्षा कवच की वजह से मुहम्मद साहब पहाड़ी पर नहीं चढ़ पा रहे थे, इसलिए अबू तला ने उन्हें अपने कंधे पर उठाकर पहाड़ी ऊपर पोहोंचा दिया। और जंग ख़तम हो गई।

इस जंग में मुहम्मद साहब के तीन दांत भी टूट गए थे। मुहम्मद साहब इतने डर गए थे कि को मदीने में उनके साथियों की लाशे थी उसको उठाकर दफन करने से भी इंकार कर दिया।

मुहम्मद साहब ने इस जंग को अल्लाह की तरफ से इम्तहान बता दिया। कभी कभी मुहम्मद साहब उन लोगों को बुराभला कहना शुरू कर देते थे जो लोग इस जंग में उन्हें छोड़कर भाग गए थे।

Source: ibn ishaq
Written and promoted by: exMuslim Spartacus